Saturday, March 28, 2015

श्रीखण्ड : एक मधुर भारतीय व्यंजन है

श्रीखण्ड : एक मधुर भारतीय व्यंजन है जो विशेष रूप से गुजरात, उत्तरप्रदेश में प्रचलित है और भारत के अन्य भागों में भी इसका आनन्द लिया जाता है।
स्थान के अनुसार इसके बनाने के तरीके अलग अलग हो सकते हैं। मैंने कभी बनाया भी नहीं है। एक बार इसे चखा है और बनाने की विधि पढ़ी भी है।
मैं अपने अनुमान से इसकी विधि लिख रहा हूँ !:baby:
सामग्री : (4-6 व्यक्तियों के लिए)
एक किलो पूर्ण जमी हुई दही (पूर्ण चिकनाई युक्त दूध से बनी)
200 ग्राम (या ज्यादा) उबाल कर ठण्डा किया हुआ पूर्ण चिकनाई युक्त दूध
150 से 200 ग्राम स्वादानुसार पिसी हुई चीनी या बूरा
4-5 केसर की कलियाँ 
5-6 छोटी इलायची (या कुछ बूंदें केवड़ा या गुलाब जल)
15-20 बादाम की गिरी
15-20 पिस्ता की गिरी
विधि :
ताजी दही को 2-3 घण्टे के लिए पतले मलमल के कपड़े में बांध कर ठण्डे स्थान पर लटका दें ताकि इसमें से पानी निकल जाए और दही और गाढ़ी हो जाए।

केसर की कलियों को 10-15 ग्राम दूध में भिगो दें। 2 घण्टे बाद इन्हें दूध में रगड़ कर घोल लें।
छोटी इलायची को 10-15 ग्राम चीनी के साथ मिला कर पीस लें !
बादाम और पिस्ता को पतले चौड़े टुकड़ों में काट लें।
दही का पानी निकल जाने के बाद इसे एक बरतन में डाल कर इसमें पिसी चीनी, पिसी इलायची मिला दें और साथ ही घुला हुआ केसर भी मिला कर अच्छी तरह मिला लें ताकि चीनी अच्छी तरह घुल जाए।
इसके बाद अगर आप इसका पेय बनाना चाह्ते हैं तो इसमें ठण्डा दूध मिला कर मेवे डाल कर ठण्डा करके पंजाबी लस्सी की तरह पेश करें !
अन्यथा
इसमें थोड़ा सा दूध डाल कर मेवे मिला कर ठण्डा करके खीर की तरह पेश करें।
और थोड़ा मेरे लिए भेजें !:baby

Thursday, March 26, 2015

मौत दे रही है जिदंगी का आॅफर

मौत दे रही है जिदंगी का आॅफर
जिदंगी दे रही है जीने का आॅफर
जीवन दे रहा है हँसने का आॅफर
इसलिए कहना है सम्पत का आओ
हर वक्त मुस्कराते रहे
जो मिला उसे हँस पर पाते रहे
जब तक जीवन है तब तक
 मित्रता निभाते रहे
निभाते रहे
देखकर किसी के बुरे दिन हम उसे कमजोर ना समझे
देखकर किसी के अच्छे दिन उसे जोर ना समझे
समय सबका आता है और जाता है
समय सबको सिखाता है और समझााता है
समय से पहले कभी किसी को कुछ नहीं मिलता है
बस! हम अपना कर्तव्य करते जाये कर्तव्य करते जाये
बाकी ईश्वर की मर्जी कहकर हँसते हँसाते जाये

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शरबत http://www.hariomcare.com/2013/02/blog-post_9221.html

शरबत

बाजारू ठंडे पेय पदार्थों से स्वास्थ्य को कितनी हानि पहुँचती है यह तो लोग जानते ही नहीं हैं। दूषित तत्त्वों, गंदे पानी एवं अभक्ष्य पदार्थों के रासायनिक मिश्रण से तैयार किये गये अपवित्र बाजारू ठंडे पेय हमारी तंदरुस्ती एवं पवित्रता का घात करते हैं। इसलिए उनका त्याग करके हमें आयुर्वेद एवं भारतीय संस्कृति में वर्णित पेय पदार्थों से ही ठंडक प्राप्त करनी चाहिए। यहाँ कुछ शरबतों की निर्माण-विधि एवं उपयोग की जानकारी दी जा रही हैः-
गुलाब का शरबतः गुलाब जल अथवा नलिकायंत्र (वाष्पस्वेदन यंत्र) द्वारा गुलाब की कलियों के निकाले गये अर्क में मिश्री डालकर उसका पाक तैयार करें। जब जरूरत पड़े तब उसमें ठंडा जल मिलाकर शरबत बना लें।
उपयोगः यह शरबत सुवासित होने के साथ शरीर की गर्मी को नष्ट करता है। अतः ग्रीष्म ऋतु में सेवन करने योग्य है।
अनार का शरबत­- अच्छी तरह से पके हुए 20 अनार के दाने निकालकर उनका रस निकाल लें। उस रस में अदरक डालकर रस गाढ़ा हो जाय तब तक उबालें। उसके बाद उसमें केसर एवं इलायची का चूर्ण मिलाकर शीशी में भर लें।
मात्राः 30 ग्राम।
उपयोगः यह शरबत रूचिकर एवं पित्तशामक होने की वजह से दवा के रूप में भी लिया जा सकता है एवं गर्मी में शरबत के रूप में पीने से गर्मी से राहत मिलती है।
द्राक्ष का शरबतः बीज निकाली हुई 60 ग्राम द्राक्ष को बिजौरे अथवा नींबू के रस में पीसें। उसमें अनार का 240 ग्राम रस डालें। उसके बाद उसे छानकर उसमें स्वादानुसार काला नमक, इलायची, काली मिर्च, जीरा, दालचीनी एवं अजवायन डालकर 60 ग्राम शहद मिलायें।
मात्राः 25 ग्राम।
उपयोगः मंदाग्नि एवं अरूचि में लाभप्रद।
इमली का शरबतः साफ एवं अच्छे गुणवाली 1 किलो इमली लेकर एक पत्थर के बर्तन में दो किलो पानी में 12 घंटे भिगो दें। उसके बाद इमली को हाथ से खूब मसलकर पानी के साथ एकरस कर दें। फिर पानी को मिट्टी के बर्तन में छान लें। उस पानी को कलई किये हुए अथवा स्टील के बर्तन में डालकर उभार आने तक उबालें। फिर उसमें मिश्री डालकर तीन तार की चासनी बनाकर काँच की बरनी में भर लें।
मात्राः 25 से 60 ग्राम।
उपयोगः पित्त प्रकृतिवाले व्यक्ति को रात्रि में सोते समय देने से शौच साफ होगा।
गर्मी में सुबह पीने से लू लगने का भय नहीं रहता।
कब्जियत के रोगी के लिए इसका सेवन लाभदायक है।
पके हुए कैथे(कबीट) का शरबतः यह भी इमली के शरबत की तरह ही बनाया जाता है।
उपयोगः यह शरबत शरीर की गर्मी की दूर करने में अत्यंत उपयोगी है। इसके अलावा पित्तशामक एवं रूचिकर भी है।
नींबू का शरबतः 20 अच्छे एवं बड़े नींबू का रस निकालें। उस रस में 500 ग्राम मिश्री डालकर गाढ़ा होने तक उबालें एवं शीशी में भरकर रख लें।
मात्राः 10 से 25 ग्राम।
उपयोगः अरुचि, मंदाग्नि, उलटी, पित्त के कारण होने वाले सिरदर्द आदि में लाभदायक है।
इसके अलावा यह शरबत आहार के प्रति रूचि एवं भूख उत्पन्न करता है।
कच्चे आम का शरबत (पना)- कच्चे आम को छीलकर पानी में उबालें। उसके बाद ठण्डे पानी में मसल-मसलकर रस बनायें। इस रस में स्वाद के अनुसार नमक, जीरा, गुड़ आदि डालकर पियें।
उपयोगः इस शरबत को पीने से गर्मी से राहत मिलती है। यह अपने देश के शीतल पेयों की प्राचीन परंपरा का एक नुस्खा है जो स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है।

Wednesday, March 25, 2015

सुन्दरकाण्ड के पाठ से बहुत सारे लाभ होते है

सुन्दरकाण्ड के पाठ से बहुत सारे लाभ होते है उनमे से कुछ हम यहाँ बता रहे है - १) इसका पाठ करने से विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है, ये आत्मविश्वासमें बढोतरी करता है और परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मददगार होता है, बुद्धि कुशाग्र होती है, अगर बहुत छोटे बच्चे है तो उनके माता या पिता उनकेलिए इसका पाठ करे.
२) इसका पाठ मन को शांति और सुकून देता है मानसिक परेशानियों और व्याधियो से ये छुटकारा दिलवाने में कारगर है,
३) जिन लोगो को गृह कलेश की समस्या है इस पाठ से उनको विशेष फल मिलते है,
४) अगर घर का मुखिया इसका पाठ घर में रोज करता है तो घर का वातावरण अच्छा रहता है,
५) घर में या अपने आप में कोई भी नकारात्मक शक्ति को दूर करने का ये अचूक उपाय है,
६) अगर आप सुनसान जगह पर रहते है और किसी अनहोनी का डर लगा रहता हो तो उसस्थान या घर पर इसका रोज पाठ करने से हर प्रकार की बाधा से मुक्ति मिलती हैऔर आत्मबल बढ़ता है.
७) जिनको बुरे सपने आते हो रात को अनावश्यक डर लगता हो इसके पाठ निश्चित से आराम मिलेगा.
८) जो लोग क़र्ज़ से परेशान है उनको ये पाठ शांति भी देता है और क़र्ज़ मुक्ति में सहायक भी होता है,
९) जिस घर में बच्चे माँ पिता जी के संस्कार को भूल चुके हो, गलत संगत मेंलग गए हो और माँ पिता जी का अनादर करते हो वहा भी ये पाठ निश्चित लाभकारीहोता है.
१०) किसी भी प्रकार का मानसिक या शारीरिक रोग भले क्यों न हो इसका पाठ लाभकारी होता है.
११) भूत प्रेत की व्याधि भी इस पाठ को करने से स्वतः ही दूर हो जाती है.
१२) नौकरी में प्रमोशन में भी ये पाठ विशेष फलदाई होता है.
१३) घर का कोई भी सदस्य घर से बाहर हो आपको उसकी कोई जानकारी मिल पा रहीहो या न भी मिल पा रही हो तो भी आप अगर इसका पाठ करते है तो सम्बंधितव्यक्ति की निश्चित ही रक्षा होगी, और आपको चिंता से भी राहत मिलेगी

शरीर के लिए आवश्यक विटामिन व प्रमुख स्रोत

शरीर के लिए आवश्यक विटामिन व प्रमुख स्रोत

विटामिन                                                     प्रमुख स्रोत 
१. विटामिन ‘ए’           पीले फल, पीली सब्जियां (आम, गाजर, पपीता, कद्दू ) 
                          गहरी हरी सब्जियां (पालक, मूली पत्ता) गौघृत, मख्खन, दूध आदि। 


२. विटामिन बी                १ जैविक आहार, अन्न ,, हरी पत्तीदार सब्जियां, 
                                       कण युक्त चावल (मील छंटा नहीं) आदि। 
                                       बी- २ ताजी हरी सब्जियां दूध, फल। 
                                       बी- ३ नींबू, अंकुरित अन्न, घी, सब्जियां ,, मूंगफली ।
                                       बी
- ६ अंकुरित अन्न, दूध, मेवे, ताजी सब्जियां, फल। 
                                       बी- १२ दूध, दही, अंकुरित अन्न। 
३. विटामिन एच-                           अंकुरित अन्न, दूध, खमीर आदि। 
४. पेन्टोथेनिक एसिड-                     अंकुरित अन्न, खमीर। 
५. कोलिन-                                  फल, साग भाजी, अंकुरित अन्न, दूध। 
६. इनोसिटाल-                              अंकुरित अन्न, खमीर आदि। 
७. फोलिक एसिड-                          अंकुरित अन्न, ताजी हरी सब्जियां। 
८. विटामिन सी-                            आंवला, अमरूद, टमाटर व अन्य खट्टे फल, 
                                              अंकुरित अन्न, ताजी हरी सब्जियां, ताजे फल। 

                                                     ताजी हरी सब्जियां, ताजे फल। 
९. विटामिन डी-                              सुबह की धूप, दूध। 
१०. विटामिन ई-             अंकुरित अन्न, हरी सब्जी, गेहूं तथा चावल के अंकुर में सबसे अधिक। 
११. विटामिन के-                           ताजी हरी सब्जी, फल, अंकुरित अन्न। 
१२. विटामिन पी-                          खट्टे फल(नींबू आदि) में। 
१३. विटामिन एफ-                         घाणी का कोई भी तेल।